केदारनाथ मंदिर

सच्ची श्रद्धा

नगरका नाम और ठीक समय याद नहीं है। वर्षा-ऋतु बीती जा रही थी; किंतु वर्षा नहीं हुई थी। किसानोंके खेत सूख रहे थे। चारे के अभाव में पशु मरणासन्न हो गये थे। जब कोई मानव-प्रयास सफल नहीं होता, तब मनुष्य उस त्रिभुवन के स्वामीकी ओर देखता है। गाँवके सब लोग गिरजाघरमें एकत्र हुए वर्षाके लिये प्रार्थना करने। एक छोटा बालक भी आया था; किंतु वह आया था अपने साथ छोटा सा छाता लेकर। किसी ने उससे पूछा-‘तुझे क्या इतनी धूप लगती है कि छाता लाया है?’

बालक बोला-‘वर्षा होगी तो घर भीगते जाना पड़ेगा, इससे मैं छाता लाया हूँ कि भीगना न पड़े।’

प्रार्थना की जायगी और वर्षा नहीं होगी, यह संदेह उस शुद्धचित बालक के मन में नहीं उठा। जहाँ इतना सरल विश्वास है, वहाँ प्रार्थना के पूर्ण होनेमें संदेह कहाँ। प्रार्थना पूर्ण होते-होते तो आकाश बादलों से ढ़क चुका था और झड़ी प्रारम्भ हो गयी थी। बालक अपना छाता लगाये आराम से घर गया। यह वर्षा इतनी भीड़ के प्रार्थना करनेसे होती या नहीं, कौन कह सकता है; किंतु वह हुई, क्योंकि प्रार्थना करनेवालोंमें वह सच्चा श्रद्धालु बालक भी था।

==============================

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक केदारनाथ मंदिर के कुछ महत्वपूर्ण राज पहली बार उजागर हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) को मंदिर के 11-12वीं सदी में निर्मित होने प्रमाण मिले हैं।

केदारनाथ मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए अक्षरों (पुरालेखों) के अध्ययन के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा। मंदिर की दीवारों पर प्रारंभिक नागरी व नागरी में लिखे अक्षर मिले, जो 11-12वीं सदी में ही लिखे जाते थे।

गौरतलब है कि पिछले साल जून में आई प्राकृतिक आपदा के बाद केदारनाथ मंदिर के भीतर जमकर मलबा भर गया था। एएसआई को मलबे की सफाई के दौरान मंदिर की दीवारों पर जगह-जगह अक्षर (पुरालेख) गुदे हुए मिले, जिनके अध्ययन के लिए मैसूर से विभाग की इफिग्राफी ब्रांच के विशेषज्ञ बुलाए गए थे।

इफिग्राफी ब्रांच के निदेशक डॉ. रविशंकर की ओर से अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर विभाग के महानिदेशक व क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून को भेजी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरालेख प्रारंभिक नागरी व नागरी में दर्ज हैं, जिससे माना जा सकता है कि मंदिर 11-12वीं सदी में अस्तित्व में आया।

विशेषज्ञों ने चिंता भी जाहिर की कि पुरालेखों में किसी तारीख का उल्लेख नहीं मिला। न ही किसी राजवंश का नाम दीवारों में दर्ज पाया गया।

महत्वपूर्ण तथ्य यह भी पता चला कि यह पुरालेख मंदिर में आने श्रद्धालुओं या आमजन का है। इनकी लिखावट आड़ी-तिरछी पाई गई, क्योंकि किसी राजा या खास पुरालेख में बनावट आदि का विशेष ख्याल रखा जाता था। पुरालेखों में दान देने, भगवान को नमन करने व मंदिर तक सकुशल पहुंचने आदि का जिक्र मिला है।

अब तक मंदिर निर्माण की मान्यताएं

एक मान्यता के अनुसार केदारनाथ मंदिर को आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने बनवाया था, जबकि राहुल सांकृत्यायन द्वारा लिखित अभिलेखों में मंदिर को 12-13वीं शताब्दी का बताया गया।

वहीं, ग्वालियर में मिली एक राज भोज स्तुति में मंदिर को 1076-99 काल का माना गया। पांडव या उनके वंशज जनमेजय के समय भी मंदिर निर्माण की बात सामने आती है।

Om Namah Shivay

***Write ” Om Namah Shivay ” if you ask for God’s blessing on your life today. Please Like, Tag and Share to bless others!

http://www.vedic-astrology.co.in/

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: