किस देवी-देवता की कितनी बार करें परिक्रमा, ताकि मिले मनोवांछित फल-2

कार्तिकेय तथा गणेश की परीक्षा

मां पार्वती की बात सुनकर कार्तिकेय तो झट से अपने मोर पर सवार होकर निकल गए ब्रह्मांड की परिक्रमा करने, लेकिन गणेश जी वहीं खड़े थे। वे आगे बढ़े, अपने दोनों हाथ जोड़े और अपने माता-पिता की परिक्रमा करने लगे। जब कार्तिकेय पृथ्वी का चक्कर लगाकर वापस लौटे और गणेश को अपने सामने पाया तो वह हैरान हो गए। उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि कैसे गणेश उनसे पहले दौड़ का समापन कर सकते हैं।

गणेश जी ने समझाया

बाद में प्रभु गणेश से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनका संसार तो स्वयं उनकी माता हैं, इसलिए उन्हें ज्ञान प्राप्ति के लिए विश्व का चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। यह कथा हमें परिक्रमा करने का महत्व समझाती है, लेकिन महत्व के साथ किस देवी-देवता की कितनी बार परिक्रमा की जाए यह भी जानना अति आवश्यक है।

परिक्रमा के नियम

जिस प्रकार से हिन्दू धर्म में हर धार्मिक कार्य एक सम्पूर्ण विधि-विधान से युक्त होता है, ठीक इसी प्रकार से परिक्रमा करने के लिए भी नियम बनाए गए हैं। परिक्रमा किस तरह से की जानी चाहिए, कितनी बार की जाए यह सब जानना जरूरी है। तभी आपके द्वारा की गई परिक्रमा फलित सिद्ध होगी।

किसकी कितनी बार की जानी चाहिए परिक्रमा

यहां हम आपको केवल देवी-देवता की परिक्रमा कितनी बार की जानी चाहिए, इसकी जानकारी देंगे। यदि आप श्रीकृष्ण की मूर्ति की परिक्रमा कर रहे हैं तो इसे तीन बार करें। तभी फल की प्राप्ति होती है।

शक्ति का रूप

आदि शक्ति के किसी भी स्वरूप की, मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, मां पार्वती, इत्यादि किसी भी रूप की परिक्रमा केवल एक ही बार की जानी चाहिए।

भगवान विष्णु

इसी तरह से भगवान विष्णु एवं उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए। श्रीगणेशजी और हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है। शिवजी की आधी परिक्रमा करनी चाहिए, क्योंकि शिवजी के अभिषेक की धारा को लांघना अशुभ माना जाता है। शायद यह बात आप पहले से जानते ना हों, इसलिए भविष्य में ध्यान रखिएगा।

ये गलतियां ना करें

परिक्रमा कितनी बार करें यह तो आपने जान लिया, लेकिन परिक्रमा करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान भी रखें। क्योंकि इस दौरान की गई गलतियां आपकी परिक्रमा को बेकार कर सकती हैं। परिक्रमा करने के आपके उद्देश्य को निष्फल कर सकती हैं।

मंत्रों का जप कर सकते हैं

आप जिस भी देवी-देवता की परिक्रमा कर रहे हों, उनके मंत्रों का जप करना चाहिए। इससे आपको अधिक लाभ मिलेगा। भगवान की परिक्रमा करते समय मन में बुराई, क्रोध, तनाव जैसे भाव नहीं होना चाहिए। परिक्रमा स्वयं आपका मन शांत जरूर करती है, लेकिन उससे पहले भी आपको खुद को शांत करना होगा।

जान लें नियम

एक बात का विशेष ध्यान रखें, परिक्रमा हमेशा नंगे पैर ही करें। परिक्रमा शास्त्रों के अनुसार एक पवित्र कार्य है, इसलिए पैरों में चप्पल पहनकर उसे अशुद्ध नहीं किया जाना चाहिए।

शांत मन से परिक्रमा करें

एक और बात… परिक्रमा करते समय बातें नहीं करना चाहिए। शांत मन से परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय तुलसी, रुद्राक्ष आदि की माला पहनेंगे तो बहुत शुभ रहता है।

गीले वस्त्रों के साथ परिक्रमा

शायद आपने कभी गौर किया हो कि परिक्रमा करने से पहले लोग स्नान करते हैं, वस्त्रों को पहने हुए ही जल में डुबकी लगाते हैं और गीले वस्त्रों से ही परिक्रमा करते हैं। दरअसल शरीर को गीला करके परिक्रमा करना शुभ माना गया है, और एक बार बदन गीला करने से जल्द ही सूख जाता है। इसलिए वस्त्र ही गीले कर लिए जाते हैं।

Om Namah Shivay

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