सत्संग और महात्माओं का प्रभाव -१० –

महात्मा पुरुष हमे याद करते है तो उसके ध्यान में हमारा चित आ जाता है । इससे भी बहुत लाभ होता है और हम महात्मा को याद करे तो भी हमे लाभ हो जाता है । वीतराग पुरुष को याद करने से जो लाभ होता है, उससे अधिक महात्मा को याद करने से होता है और उससे भी अधिक विशेष लाभ श्रीभगवान् को याद करने से होता है । स्मरण करने योग्य तो श्रीभगवान् ही है । उनकी स्मृति मात्र से मनुष्य का कल्याण हो जाता है । भगवान् में शरीर-शरीरी भेद नही है । अत: उनका शरीर दिव्य-अलौकिक चिन्मय है । परन्तु महात्मा का शरीर ऐसा नही है । महात्मा का शरीर तो पंचभौतिक है । इसलिए भगवान् को दिव्य-चिन्मय माधुर्य-मूर्ति कहते है । उनके दर्शन, भाषण, स्पर्श सभी आनन्दप्रद और कल्याणकर होते है । इसलिए भगवान् के समान तो भगवान् ही है । परतु महात्मा पुरुष का स्मरण-सँग भी अत्यंत लाभदायक है । महापुरुष के सँग की महिमा बताते हुए कहा गया है-

एक घड़ी आधी घड़ी आधी में पुनि आध ।
तुलसी संगत साधू की, कटे कोटि अपराध ।।

एक घड़ी, आधी घड़ी या आधी में भी आधी घड़ी का जो महात्मा पुरुषों का सँग है, उसका इतना महात्म्य है की उससे करोड़ो अपराध कट जाते है । यह समझे की एक घड़ी चौबीस मिनट की होती है, आधी बारह मिनट की और आधी से भी आधी यानी चौथाई छ: मिनट की ।

महात्माओं के पहचानने की एक साधारण युक्ति यह है की जैसे अग्नि के समीप जाने से जानेवाले पर अग्नि का कुछ-न-कुछ प्रभाव जरुर पड़ता है, वैसे ही महात्मा के समीप जाने से महात्मा का प्रभाव पड़ता है । जैसे सरकार के किसी सिपाही को देखने से सरकार की स्मृति होती है, वैसे ही भगवान् के भक्त के दर्शन से भगवान् की स्मृति होती है । जिसका सँग करने से अपने में दैवी सम्पदा के लक्षण आवे, जिसके सँग से, जिसके साथ वार्तालाप करने से, दर्शन से, स्पर्श से आत्मा का सुधार हो, अपने में भक्तों के लक्षण प्रगट होने लगे, गुणातीत पुरुषों के लक्षण आने लगे तो समझना चाहिये की यह महापुरुष है ।

जब हम महापुरुषों का सँग करने के लिए जाय तो हम यह समझे की हम ज्ञान के पुन्ज् के सम्मुख जा रहे है । जैसे सूर्य के सम्मुख जाने से अन्धकार तो दूर भाग ही जाता है, किन्तु अधिक-से-अधिक प्रकाश होता चला जाता है । हम देखते है की जब प्रात:काल सूर्य उदय होता है, तब ज्यों-ज्यों सूर्य नजदीक आता है त्यों-ही-त्यों सूर्य के प्रकाश का अधिक असर पड़ता है । वैसे ही हम जितने ही महात्माओं के समीप होते है, उतना ही हमको अधिक लाभ मिलता है । वे एक ज्ञान के पुंज है, उस ज्ञानपुंज से हमारे अज्ञानान्धकार का नाश होकर हमारे ह्रदय में भी ज्ञान-सूर्य का प्रागटय होता है ।

Om Namah Shivay

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