किस देवता का वाहन कौन है और क्यों?-1

हिंदू धर्म में विभिन्न देवताओं का स्वरूप अलग-अलग बताया गया है। हर देवता का स्वरूप उनके आचरण व व्यवहार के अनुरूप ही हमारे धर्म ग्रंथों में वर्णित है। स्वरूप के साथ ही देवताओं के वाहनों में विभिन्नता देखने को मिलती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार अधिकांश देवताओं के वाहन पशु ही होते हैं।

भगवान श्रीगणेश का वाहन मूषक
भगवान श्रीगणेश का वाहन है मूषक अर्थात चूहा। चूहे की विशेषता यह है कि यह हर वस्तु को कुतर डालता है। वह यह नही देखता की वस्तु आवश्यक है या अनावश्यक, कीमती है अथवा बेशकिमती। इसी प्रकार कुतर्की भी यह विचार नही करते की यह कार्य शुभ है अथवा अशुभ। अच्छा है या बुरा। वह हर काम में कुतर्कों द्वारा व्यवधान उत्पन्न करते हैं। श्रीगणेश बुद्धि एवं ज्ञान हैं तथा कुतर्क मूषक है। जिसको गणेशजी ने अपने नीचे दबा कर अपनी सवारी बना रखा है। यह हमारे लिए भी शिक्षा है कि कुतर्कों को परे कर उनका दमन कर ज्ञान को अपनाएं।

भगवान विष्णु का वाहन गरूड़
भगवान विष्णु का वाहन गरूड़ है। इसे पक्षियों का राजा भी कहते हैं। गरूड़ की यह विशेषता है कि आसमान में बहुत उंचाई पर उड़कर भी वह पृथ्वी के छोटे-छोटे से जीवों पर नजर रख सकता हैं। उसमें अपरिमित शक्ति होती है। वैसे ही भगवान विष्णु सबका पालन करने वाले तथा प्रत्येक जीव का ध्यान रखने वाले होते हैं। उनकी नजर सदा प्रत्येक जीव पर होती है। उन पर सबकी रक्षा का भार भी हैं इसलिए वह परम शक्तिशाली भी हैं।

भगवान शंकर का वाहन बैल
धर्म ग्रंथों में भगवान शंकर का वाहन बैल बताया गया है। बैल बहुत ही मेहनती जीव होता हैं। वह शक्तिशाली होने के बावजूद शांत एवं भोला होता है। वैसे ही भगवान शिव भी परमयोगी एवं तप के बल पर शक्तिशाली होते हुए भी परम शंात एवं इतने भोले हैं कि उनका एक नाम ही भोलेनाथ जगत में प्रसिद्ध है। भगवान शंकर ने जिस तरह काम को भस्म कर उस पर विजय प्राप्त कि थी उसी तरह उनका वाहन भी कामी नही होता। उसका काम पर पूरा नियंत्रण होता है।

देवी का वाहन शेर
शास्त्रों में देवी का वाहन सिंह यानी शेर बताया गया है। शेर एक संयुक्त परिवार में रहने वाला प्राणी होता हैं। वह अपने परिवार की रक्षा करने के साथ ही सामाजिक रूप से वन में रहता है। वह वन का सबसे शक्तिशाली प्राणी होता है किंतु अपनी शक्ति को व्यर्थ में व्यय नही करता, आवश्यकता पडऩे पर ही उसका उपयोग करता हैं। यह संदेश देवी के इस वाहन से मिलता है कि घर की मुखिया स्त्री को अपने परिवार को जोड़कर रखना चाहिए तथा व्यर्थ के कार्यों में अपनी बुद्धि को नही लगाकर घर को सुखी बनाने के लिए ही लगातार प्रयास करना चाहिए।

गंगा का वाहन मगर
धर्म ग्रंथों में माता गंगा का वाहन मगरमच्छ बताया गया है। इससे अभिप्राय है कि हमें जल में रहने वाले हर प्राणी की रक्षा करनी चाहिए। अपने निजी स्वार्थ के लिए इनका शिकार करना उचित नहीं है क्योंकि जल में रहने वाला हर प्राणी पारिस्थितिक तंत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनकी अनुपस्थिति में पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ सकता है।

Om Namah Shivay

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