खुद को कठिन कर्मों से तपाना ही है तप

भगवान शिव को सदैव से ही परब्रह्म कहा गया है। उनकी व्याख्या परमतत्व के रुप में की गई है। भगवान शिव की पूजा न केवल मनुष्य मात्र ही करते है। बल्कि देव, महर्षि, ऋषि और गन्धर्व तक करते है

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हे देव, आप ही इस संसार के सृजक, पालनकर्ता एवं विलयकर्ता हैं| चारो वेद आपके ही सहिंता गाते हैं,
तीनों गुण (सतो-रजो- तमो) आपसे ही प्रकाशित हैं|आपकी ही शक्ति त्रिदेवों में निहित है| इसके बाद भी कुछ मूढ़प्राणी आप की शक्तियों पर शंशय करते हैं जो की सर्वथा अनुचित है|
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खुद को कठिन कर्मों से तपाना ही है तप
तप अर्थात् तपना, दाह, दग्ध होना। अभिष्ट सिद्धि के लिए किया जाने वाला कठोर एवं कष्टदायक आचरण ही तप है। अपने ईष्ट को मनाने के लिए उनकी कृपा प्राप्त हो, इसके लिए कठिन तप का आचरण किया जाता है। तप भगवान को पाने का मार्ग तो है ही साथ ही खुद के शरीर को साधने के लिए भी आवश्यक क्रिया है। शरीर को कठिन क्रियाओं से हम मौसम और प्रकृति के अनुकूल बनाते हैं। इसी को तपस्या कहते हैं। तप के प्रकार-भूखे रहकर – जब तक मनोकामना पूर्ण ना हो तब तक भूखे रहकर(अनशन) करके तप किया जाता है।- गर्मी में अग्नि के करीब बैठकर एवं ठंड में पानी के अंदर खड़े होकर तप किया जाता है। बरसात में बाहर रहकर तप किया जाता है।कठिन मेहनत एवं प्रयास से ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करना ही तप है।अभिष्ट सिद्धि के अलावा पापों के प्रायश्चित के लिए भी तप किया जाता है। व्रत, उपवास, भूखा रहना, मौन रहना, सत्य बोलना एक समय भोजन करना, सुबह जल्दी उठना, योग करना, व्यायाम करना, दिन में नहीं सोना, शराब, सिगरेट, जुआ-सट्टा आदि कोई नशा नहीं करना अपने धर्म के अनुसार आचरण करना। यह सब तप की श्रेणी में ही आते हैं।शिवजी से विवाह करने के लिए माता पार्वती ने एवं श्रीगंगाजी को धरती पर उतारने के लिए भागीरथजी ने कठोर तप किया था।धरती और जल छ: माह तपते हैं,तभी उन्हें बरसात की ठंडी फुहार मिलती है। श्री रामचरितमानस में उल्लेख है कि तप से ब्रह्मा, विष्णु और शंकर सृष्टि का सृजन पालन और संहार करते हैं। तप में बड़ी शक्ति होती है।वैज्ञानिक महत्व – जिस तरह सोने को तपाने से उसका मेल निकल जाता है। उसी प्रकार शरीर को तप द्वारा सुखाने से उसके अंदर स्थित मल विकार का नाश हो जाता है। उपवास, व्रत करने से पेट की आंतों को आराम मिलता है। व्यायाम आदि एवं कम आहार से चुस्ती-स्फुर्ति बनी रहती है, तथा सभी कार्य समय पर निपटते हैं। दिन में नहीं सोने से कफ जनित रोग नहीं होते हैं। व्यसन आदि नहीं होने से शरीर रुग्ण नहीं होता तथा धन लाभ होता है।

Om Namah Shivay

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http://www.vedic-astrology.co.in/

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1 Comment (+add yours?)

  1. sunny
    Jun 04, 2016 @ 17:54:45

    har har mhadev

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