शूर्पणखा क्यों चाहती थी भ्राता रावण का सर्वनाश?

कुशल राजा रावण

महाविद्वान रावण के विषय में हम सब यह जानते हैं कि वह महान पंडित होने के साथ-साथ एक कुशल राजा भी था। रावण ने अपने जीवनकाल में कई प्रकार की उपलब्धियां हासिल की थीं।

महाविद्वान रावण

रावण जितना दुष्ट था, उसमें उतनी खूबियां भी थीं, शायद इसीलिए कई बुराइयों के बाद भी रावण को महाविद्वान और प्रख्यात पंडित माना जाता था।

जीवन से जुड़ा नाता

लेकिन असल में रावण एक ऐसा पात्र है जो हमारे जीवन से जुड़ा हुआ है। कोई भी ऐसा व्यक्ति जो थोड़ा गुस्सैल स्वभाव का हो उसकी तुलना हम रावण से कर देते हैं।

विभिन्न ग्रंथों में रावण का उल्लेख

रावण से जुड़ी कई रोचक बातें हैं, जो आम कहानियों में सुनने को नहीं मिलतीं। विभिन्न ग्रंथों में रावण को लेकर कई बातें लिखी गई हैं।

रावण से जुड़ी अनोखी बातें

फिर भी रावण से जुड़ी कुछ अनोखी बातें हैं, जो अपने आप में बेहद दिलचस्प हैं। आइए हम चर्चा करते हैं ऐसी ही कुछ बातों की:

घोड़ों की जगह गधों का इस्तेमाल

वाल्मीकि रामायण के मुताबिक सभी योद्धाओं के रथ में अच्छी नस्ल के घोड़े होते थे लेकिन रावण के रथ में गधे हुआ करते थे। वे बहुत तेजी से चलते थे।

किया सरस्वती की वीणा का अविष्कार

रावण संगीत का बहुत बड़ा जानकार था। सरस्वती के हाथ में जो वीणा है उसका अविष्कार भी रावण ने किया था।

तंत्र, मंत्र और आयुर्वेद का विशेषज्ञ रावण

रावण ज्योतिषी तो था ही तंत्र, मंत्र और आयुर्वेद का भी विशेषज्ञ था।

भगवान शिव को बनाया गुरु

भगवान शिव ने युद्ध में रावण को परास्त किया था। भगवान शिव से युद्ध में हारकर ही रावण ने उन्हें अपना गुरु बनाया था।

बालि ने की चार समुद्रों की परिक्रमा

बालि ने रावण को अपनी बाजू में दबा कर चार समुद्रों की परिक्रमा की थी।

देवताओं में था रावण का डर

रामचरितमानस के अनुसार रावण के दरबार में सारे देवता और दिग्पाल हाथ जोड़कर खड़े रहते थे।

अशोक वाटिका

रावण के महल में स्थित अशोक वाटिका में अशोक के एक लाख से ज्यादा वृक्ष थे। इस वाटिका में सिवाय रावण के किसी अन्य पुरुष को जाने की अनुमति नहीं थी।

घोड़ों के साथ बांधा रावण को

रावण जब पाताल के राजा बलि से युद्ध करने पहुंचा तो बलि के महल में खेल रहे बच्चों ने ही उसे पकड़कर अस्तबल में घोड़ों के साथ बांध दिया था।

अकेले दम पर जीते कई युद्ध

रावण जब भी युद्ध करने निकलता तो खुद बहुत आगे चलता था और बाकी सेना पीछे होती थी। उसने कई युद्ध अकेले ही जीते थे।

यमराज को भी किया परास्त

रावण ने यमपुरी जाकर यमराज को भी युद्ध में हरा दिया था और नर्क की सजा भुगत रही जीवात्माओं को मुक्त कराकर अपनी सेना में शामिल किया था।

नंदी जी ने दिया श्राप

एक बार रावण भगवान शंकर से मिलने कैलाश गया। वहां उसने नंदीजी को देखकर उनके स्वरूप की हंसी उड़ाई उन्हें बंदर के समान मुख वाला कहा। तब नंदीजी ने रावण को श्राप दिया कि बंदरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा।

सीता का किया हरण

जब लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक-कान काटे तो उसी से क्रोधित होकर ही रावण ने सीता का हरण किया था ।

शूर्पणखा ने रावण को दिया सर्वनाश का श्राप

लेकिन स्वयं शूर्पणखा ने भी रावण का सर्वनाश होने का श्राप दिया था। क्योंकि रावण की बहन शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था।

सेनापति था विद्युतजिव्ह

वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था। रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ।

रावण ने किया शूर्पणखा के पति का वध

उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का वध कर दिया। तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।

Om Namah Shivay

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