श्रीयंत्र को सिद्ध कर पाएं अकूत धन-संपदा

श्रीयंत्र

बहुत से घरों में आपने श्रीयंत्र को स्थापित देखा होगा। जो लोग श्रीयंत्र के विषय में नहीं जानते वह इसे मात्र कोई साधारण सी चीज ही मानते हैं। यहां तक कि जिन घरों में यह यंत्र स्थापित भी होता है वे भी इसकी महिमा और इसके महत्व को नहीं समझते। “कभी सुना था कि ये यंत्र घर में रखना शुभ होता है, इसलिए इसे रख लिया”, जब भी उनसे श्रीयंत्र के विषय में पूछा जाए तो अधिकांशत: यही जवाब देते हैं।

श्रीयंत्र का महत्व

आम जनमानस की समस्या ही यही है कि जितनी जल्दी उसके दिमाग में सवाल कुलबुलाते हैं, जिज्ञासा हिलोरे मारती है, उससे भी ज्यादा जल्दी वह सब कुछ भूलकर भेड़चाल में फंस जाता है। अगर आप भी श्रीयंत्र को घर में रखने जैसी भेड़चाल के शिकार हैं तो आज हम आपको इस यंत्र के महत्व और इसके पीछे की पौराणिक कथा से अवगत करवाने जा रहे हैं, ताकि आप श्रीयंत्र की उपयोगिता को समझ सकें।

आदि शंकराचार्य का तप

श्रीयंत्र से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार एक बार अपने तप के बल से आदि शंकराचार्य ने भगवान शिव को अत्यंत प्रसन्न किया। जब शिव जी ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो आदि शंकराचार्य ने उनसे विश्व कल्याण का उपाय पूछा।

शिव का वरदान

तब भगवान शंकर ने आदि शंकराचार्य को श्रीयंत्र प्रदान कर यह कहा कि यही विश्व कल्याण का आधार बनेगा। श्रीयंत्र प्रदान करते हुए भगवान शंकर ने आदि शंकराचार्य को श्रीयंत्र देते हुए कहा कि यह साक्षात देवी लक्ष्मी का स्वरूप है। इसके अलावा यह भी कहा कि श्रीयंत्र देवी भगवती महात्रिपुर सुदंरी का आराधना स्थल है, इस यंत्र के चक्र में उनका निवास स्थान है। इस यंत्र में देवी स्वयं विराजती हैं इसलिए यह विश्व का कल्याण करेगा।

रामबाण

आज का मनुष्य पूरी तरह भौतिकवाद से ग्रस्त हो चुका है और उसका जीवन लालच और प्रतिस्पर्धा की भेंट चढ़ चुका है। उसे अनेक प्रकार के अवसाद और समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में घर में श्रीयंत्र की स्थापना उसकी सभी समस्याओं के लिए रामबाण बन सकती है।

सौभाग्य की वर्षा

इस यंत्र को श्रद्धा और आस्था के साथ अपने घर, ऑफिस या किसी अन्य व्यवसायिक स्थल पर स्थापित करने और प्रतिदिन इसकी पूजा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और उनकी आराधना करने वाले व्यक्ति पर सौभाग्य, धन, वैभव की वर्षा करती हैं।

वास्तुदोष

अगर स्थान वास्तुदोष से पीड़ित हो या वास्तु के आधार पर सुख प्राप्त करने की इच्छा हो तो घर या ऑफिस की चारदीवारी के भीतर इस यंत्र को स्थापित करना चाहिए।

श्रीयंत्र के वृत्त

श्रीयंत्र में विभिन्न वृत्त और इसके केन्द्र में बिंदु मौजूद होती है। चारो ओर को मिलाकर इसमें नौ त्रिकोण होते हैं, जिनमें 5 के किनारे ऊपर की ओर और 4 के नीचे की ओर होती हैं।

श्रीयंत्र के प्रकार

यह यंत्र सर्व सिद्धिदायक कहा जाता है। इसे यंत्र राज भी कहा जाता है। श्रीयंत्र अनेक प्रकार के होते हैं, जिनमें भोजपत्र, त्रिलोह, ताम्रपत्र, रजत और स्वर्ण पत्र बने श्रीयंत्र मुख्य रूप से शामिल हैं।

टिक और सोने का यंत्र

इसके अलावा श्रीयंत्र स्फटिक का भी बना होता है। स्फटिक या सोने के बने श्रीयंत्र को शास्त्रों के अनुसार शुभ मुहूर्त पर ऊर्ध्वमुखी यंत्र की पूजा करने के बाद कमलगट्टे की माला से जप करने से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा अधोमुखी श्रीयंत्र को स्थापित करने से पहले उसके मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जाप करने से शत्रु और रोगों से मुक्ति मिलती है।

Om Namah Shivay

***Write ” Om Namah Shivay ” if you ask for God’s blessing on your life today. Please Like, Tag and Share to bless others!

http://www.vedic-astrology.co.in/

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: