मैं तो शिव हूँ! शिव हूँ मैं!!

चिदानन्द का सत्य रूप हूँ;
मैं तो शिव हूँ! शिव हूँ मैं!!
मन या बुद्धि नहीं मैं कोई,
चित्त, अहंकार भी नहीं;
आँख, कान, जिह्वा मैं ना हूँ,
त्वचा और नासिका नहीं.
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु जैसा
भौतिक तत्व नहीं हूँ मैं.
चिदानन्द का सत्य रूप हूँ;
मैं तो शिव हूँ! शिव हूँ मैं!!

मैं शरीर में प्राण नहीं हूँ,
और पाँच वायु भी नहीं; 
सात धातु से नहीं बना हूँ, 
पंचकोश भी कहीं नहीं.
हाथ, पैर, मल, मूत्र, वाक की
कर्मेन्द्रियाँ नहीं हूँ मैं.
चिदानन्द का सत्य रूप हूँ;
मैं तो शिव हूँ! शिव हूँ मैं!!

राग-द्वेष से विरक्त हूँ मैं,
लोभ-मोह से मुक्त सदा;
किसी तरह का मद नहीं मुझमें,
घमण्ड से हूँ दूर सदा.
धर्म, अर्थ, काम या मोक्ष की
चाह नहीं करता हूँ मैं.
चिदानन्द का सत्य रूप हूँ;
मैं तो शिव हूँ! शिव हूँ मैं!!

पाप-पुण्य से ऊपर हूँ मैं,
सुख-दुख हैं समान मुझको;
मन्त्र, तीर्थ, वेद, यग्य की भी
तनिक नहीं इच्छा मुझको.
भोजन नहीं, भोज्य भी ना मैं
और न ही भोक्ता हूँ मैं.
चिदानन्द का सत्य रूप हूँ;
मैं तो शिव हूँ! शिव हूँ मैं!!

डर है नहीं म्रित्यु का मुझको,
मेरी कोई जाति नहीं;
मेरा कोई पिता न माता,
जन्मा भी मैं कभी नहीं.
बन्धु, मित्र मेरा नहीं कोई,
न मैं शिष्य ना गुरु हूँ मैं.
चिदानन्द का सत्य रूप हूँ;
मैं तो शिव हूँ! शिव हूँ मैं!!

संकल्प-विकल्प से परे हूँ,
निराकार अस्तित्व मेरा;
सर्वव्याप्त हूँ, मैं असीम हूँ,
सब इन्द्रियों में वास मेरा.
नहीं कामना मुझे मुक्ति की,
सुखी, आत्म-सन्तुष्ट हूँ मैं.
चिदानन्द का सत्य रूप हूँ;
मैं तो शिव हूँ! शिव हूँ मैं!!

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