सत्संग और महात्माओं का प्रभाव -३ –

दुसरे नम्बर का सत्संग है-भगवान के प्रेमी भक्तो का या सत-रूप परमात्मा को प्राप्त जीवनमुक्त पुरुष का सँग । तीसरे नम्बर का सत्संग है-उन उच्चकोटि के साधकों का सँग, जो परमात्मा की प्राप्ति के लिए साधन कर रहे है । चौथे नम्बर का सत्संग उन सत-शास्त्रों के स्वाध्याय को कहते है, जिनमे भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और सदाचार का वर्णन है । ऐसे सत-शास्त्रों का सदा प्रेमपूर्वक पठन, मनन और अनुशीलन करने से भी सत्संग का ही लाभ प्राप्त होता है ।

इनमे सर्वश्रेष्ठ प्रथम नम्बर का सत्संग है तो भगवान् की कृपा से ही मिलता है । उसी के लिए सारी साधनाएँ की जाती है । परन्तु संसार में महापुरुषों का-महात्माओं का सँग प्राप्त होना भी कोई साधारण बात नही है । यह भी बड़े ही सोभाग्य से मिलता है ।

पुण्यपुंज बिनु मिलही न संता । सत्संगति संसृति कर अंता ।।

पुन्यपुंज यानी पूर्व के महान शुभ-संस्कारों के संग्रह से ही महापुरुषों का सँग मिलता है । ऐसे सत्संग का फल संसार के आवागमन से यानी जन्म-मरण से सर्वथा छुट जाना है । महात्मा के सँग से जैसा लाभ होता है, वैसा लाभ संसार के किसी के भी सँग से नही हो सकता । संसार में लोग पारस की प्राप्ति को बड़ा लाभ मानते है, परन्तु सत्संग का लाभ तो बहुत ही विलक्षण है ।

Om Namah Shivay

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